हेपटाइटिस बी यह बीमारी एक बड़ी जागतिक समस्या है। हेपटाइटिस बी नाम के एक व्हायरस (विषाणु) के कारण यकृत को संसर्ग पहुँचानेवाली यह बीमारी जानलेवा बन सकती है। इस विषाणू का संसर्ग अल्पकालीन (एक्यूट) या दीर्घकालीन (क्रॉनिक) हो सकता है। अल्पकालीन संसर्ग छह महीनों तक टिक सकता है। आम तौर पर ज्यादह तर लोगों को वयस्कता में संसर्ग हुआ है तो वह अल्पकालीन साबित होता है। कुछ मामलों में अल्पकालीन संसर्ग दीर्घकालीन बीमारी में बदल सकता है। अपने शरीर की रोगप्रतिकार करने की शक्ति (इम्युनिटी) अगर कम पड गयी तो ऐसा होता है। संसर्ग आगे क्रॉनिक हो गया तो वह जिंदगी भर साथ नहीं छोड़ता। इस संसर्ग के कारण आगे चलकर लिव्हर (यकृत) का सिरोसिस या कर्करोग (कॅन्सर) हो सकता है। अगर बचपन में ही यह संसर्ग हुआ है तो वह दीर्घकालीन बीमारी बनाने का खतरा ज्यादा होता है।
दुनिया भर में २५ करोड़ लोग दीर्घकालीन संसर्ग (क्रोनिक इन्फेकशन) के शिकार है ऐसा एक अनुमान है। आम लोगों में हेपटाइटिस बी के बारे में बहुत काम जागरूकता है। २०१६-१७ में WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में ऐसा पाया गया की २५ करोड़ कुल बाधित लोगों में से केवल २.७ करोड (१०.५ प्रतिशत) लोग को अपने संसर्ग के बारे में सचेत थे। उन में से केवल ४५ लाख लोगों का निदान निश्चित हो कर उन का इलाज हो रहा था।
हेपटाइटिस बी का संसर्ग खून, वीर्य या अन्य शारीरिक द्रवों के संपर्कवश होता है। अगर स्त्री हेपटाइटिस बी से बाधित है तो उस का संसर्ग प्रेगनेन्सी डिलिवरी के दौरान बच्चे को पहुँच सकता है। प्रसुति के दौरान संसर्ग संचारित होने का संभव ज्यादह रहता है। कभी कभी स्तनपान के माध्यम से भी बच्चे तक संसर्ग पहुँच सकता है।
पुरुष को अगर क्रोनिक हेपटाइटिस बी की बाधा है तो उस के कारण पुरुष-स्थित वन्ध्यत्व उत्पन्न हो सकता है। हेपटाइटिस बी विषाणु का डीएनए शुक्राणु में समाविष्ट होने के कारण वीर्य का प्रमाण घटना, कुल-शुक्राणु संख्या में कमी निर्माण होना, शुक्राणु की फुर्ती और रचना बाधित होना ऐसी स्थितियों का निर्माण होता है। अगर किसी जोड़े में केवल पुरुष क्रॉनिक हेपटाइटिस बी से बाधित हो तो महिला का टीकाकरण (व्हॅक्सिनेशन) करने से प्रेग्नेंसी के दौरान जन्म के पहले अपत्य तक संसर्ग पहुँचने का खतरा टलता है।
इनफर्टिलिटी का कोई भी इलाज शुरू करने के पहले हेपटाइटिस बी, हेपटाइटिस सी और HIV जैसे इन्फेकशन की छानबीन करना निहायत जरुरी होता है। पुरुष या स्त्री में से कोई भी एक या दोनों हेपटाइटिस बी से बाधित हो तो गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट के साथ सलाह मशविरा करना आवश्यक है। दोनों में से कोई एक अगर संसर्ग से बचा हुआ है तो उस का टीकाकरण करना चाहिए और फर्टिलिटी एक्सपर्ट के मशविरे से आगे का इलाज तय करना उचित रहता है।