हिस्टेरोसालपिंगोग्राम यह एक ग्रीक शब्द है। हिस्टेरो का मतलब गर्भाशय है। साल्पिंगो का मतलब ट्यूब याने नलिका है। और ग्राम का मतलब ड्रॉइंग याने रेखाचित्र है। तो एचएसजी का मतलब गर्भाशय से निकल कर अंडाशय की तरफ बढ़नेवाली दोतरफ़ा बीजाण्डवाहक नलिकाओं का (फैलोपियन ट्यूब्स) और गर्भाशय का छवि – चित्र। इस का मकसद होता है फैलोपियन ट्यूब्स में कोई रूकावट है या नहीं यह देखना। स्वाभाविक प्रेग्नेंसी के लिए और IUI इलाज के लिए दोनों नलिकाएँ बिना कोई अवरोध के, स्पष्ट होनी चाहिये।
इन नलिकाओं की कोई समस्या या उन का अवरोधित होना इनफर्टिलिटी का प्रमुख कारण होता है। २५ से ३० प्रतिशत केसेस में इसी वजहसे प्रजनन में बाधा आती है। और अवरोधित नलिकाओं के कारण एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी का धोका बढ़ता है जिस से गर्भाशय के बजाय नलिका के अंदर ही गर्भ प्रत्यारोपित हो जाता है।
एचएसजी की गतिविधियाँ क्या हैं?
माहवारी के ७-९ वे दिन एचएसजी किया जाता है। यह कार्यविधि रेडियोलॉजिस्ट उन के क्लिनिक में करते हैं। गायनोकॉलोजी एग्जामिनेशन की पोज़ में आप को टेबल पर लेटने को कहा जाता है। पहले आपकी पोज़िशन एक्स-रे के लिए ठीकठाक एडजस्ट की जाती है। आप के योनिमार्ग में एक वीक्षणयंत्र (जिसे स्पेक्युलम कहते हैं) प्रविष्ट किया जाता है जिस से ग्रीवा प्रदेश स्पष्ट दिखाई दें । साथ ही एंटीसेप्टिक सोल्युशन से ग्रीवा प्रदेश साफ किया जाता है। फिर एक छोटा लचीला कैथेटर गर्भाशय में डाला जाता है और उस के बाद स्पेक्युलम निकाला जाता है। आप को एक्स-रे निकलने के दौरान समतल, निष्चल लेटे रहने को कहा जाता है। एक्स रे लेनेके पहले कैथेटर से एक रंगीन डाई नाप तोल के धीरे से अंदर छोड़ा जाता है। एक्स रे के माध्यम से रेडियोलॉजिस्ट डाई गर्भाशय से बीजाण्ड नलिका में प्रवेश करते सीधा देख सकते हैं। इस एक्स रे तकनीक को फ्लोरोस्कोपी कहते हैं। इस तकनीक से अगर नलिकाओं में रुकावट है तो वह किस जगह याने शुरूमे है, बिच में है या आखिरी हिस्से में है यह देखा जा सकता है।
इस प्रक्रिया के बाद कोई जटिलता (कॉम्प्लीकेशन्स) उत्पन्न होती है क्या?
डाई की एलर्जी, गर्भाशय को क्षती पहुँचना, श्रोणिप्रदेश में संसर्ग होना आदि कॉम्प्लिकेशन का संभव रहता है लेकिन वह बहुत ही विरला है। एचएसजी करते द्वारा दर्द होता है और बाद में सिकुड़न होना या खून के धब्बे दिखाई देना यह कभी कभी हो सकता है।
अगर आप को निम्नलिखित लक्षण में से कोई लक्षण दिखाई दें तो फर्टिलिटी डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।
- योनिमार्ग से बदबूदार स्त्राव निकल आना
- उलटी होना
- मूर्छा या चक्कर आना
- पेट में सिकुड़न या दर्द होना
- रक्तस्त्राव होना
- ठंड लगाना या बुखार आना
एचएसजी के लिए पूर्व तैयारी कैसे करें?
- एचएसजी कहाँ करवाना है यह आप आप के फर्टिलिटी डॉक्टर या आप के गायनेकोलॉजिस्ट इन से मशवरा कर के तय कर सकते हैं। जाने पहचाने केंद्र का चयन करना महत्त्वपूर्ण है जिस से कॉम्प्लकेशन्स टल सकें, स्पष्ट छवि प्राप्त हो और सही रिपोर्ट मिलें।
- डाई की एलर्जी विरला होती है लेकिन अगर आप को ऐसे एलर्जी का अनुभव आया हो (किसी सीटी स्कैन या IVP के दौरान) तो आप ने डॉक्टर को पूर्व सूचना देना जरुरी है।
- एचएसजी शुरू करने के पहले एंटी इनफ्लमेटरी पेनकिलर लेना उचित होता है। कैथेटर डालते वख्त सिकुड़न होने की संभावना रहती है। ऐसा हो तो एंटी इनफ्लमेटरी पेनकिलर काम आता है। उसी दिन बाद में और एक गोली चाहे तो ले सकते है।
- कोई एंटी बायोटिक पहले या बाद में लेना जरुरी है या नहीं यह डॉक्टर से पूछना चाहिए।
- साथ में सैनिटरी पैड ले जाएँ | बाद में खून के धब्बे निकल सकते हैं।
- अपने हजबैंड या कोई नजदीकी रिश्तेदार या सहेली साथ हो तो अच्छा है।
- एचएसजी वाले दिन काम से छुट्टी लेना उचित है। एचएसजी बड़ा प्रोसीजर नहीं है, लेकिन सिकुड़न और खूनके धब्बे गिरने से आप को परेशानी हो सकती है। दिनभर मचलन या बेचैनी होती है। इस लिए छुट्टी लें तो बेहतर।
क्या एचएसजी को अन्य पर्याय हैं?
एचएसजी के लिए अन्य पर्याय भी हो सकते हैं।
- हिस्टेरोलैप्रोस्कोपी: यह एक शल्यक्रिया है। इस के लिए बेहोशी की दवा देना आवश्यक होता है। गर्भाशय का अंदरूनी और बाह्यातकारी परिक्षण, बीजाण्ड नलिकाएँ, अंडाशय और श्रोणिप्रदेश के अन्य अवयव सब का निरिक्षण किया जा सकता है।
- सोनोसाल्पिंगोग्राफ़ी: इस तकनीक में कैथेटर द्वारा गर्भाशय में हवा और सलाइन का मिश्रण प्रविष्ट किया जाता है और अल्ट्रासोनोग्राफी के माध्यमसे बीजाण्ड नलिकाएँ और गर्भाशय का अवलोकन किया जाता है।