सेकंडरी इनफर्टिलिटी के कारक
बढती उम्र के साथ, स्त्री की प्रजनन क्षमता कम होती जाती है ।
पहली प्रेगनेन्सी के बाद उसे एंडोमेट्रिओसिस का विकार उत्पन्न हो सकता है ।
अगर पहले प्रेगनेन्सी के दौरान सिझेरियन किया गया हो या बादमे किसी वजह गायनेक या पेट की शलयक्रिया की गयी हों तो गर्भाशय का बाहरी हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है। उस के कारण गर्भधारण में अड़चन पैदा हो सकती है।
थायरॉइड की बीमारी, पीसीओएस (PCOS) या ऑटोइम्यून बीमारी से हार्मोन असंतुलन निर्माण होता है जो गर्भधारणा के लिए अड़चने पैदा करता है।
लैंगिक संबंधों के द्वारा (सेक्शुअली ट्रांस्मिटेड इंफेक्शन – STI) कोई संसर्ग हुआ है तो उसकी वजह से भी गर्भधारण में अड़चन हो सकती है।
हजबैंड के शुक्राणु में कोई कमी उत्पन्न होने से भी दूसरे प्रेगनेन्सी में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
सेकंडरी इनफर्टिलिटी हो तो उस का क्या इलाज?
अगर पहली बार आप को कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन बाद में आप को एक साल से ज्यादह कोशिश करने के बावजूद प्रेग्नेंट होने में असफलता मिली है (या आपकी आयु ३५ के आगे है और छह महीनोंसे ज्यादह समय आप असफल रही हैं) तब हजबैंड और वाईफ दोनों को परीक्षा के लिए फर्टिलिटी डॉक्टर से मिलना जरुरी है।
संपूर्ण फर्टिलिटी मूल्याङ्कन करने के बाद विशिष्ट कारणों का पता चलकर इलाज के लिए आगे कौनसे कदम उठाने है समझ में आता है।
सेकंडरी इनफर्टिलिटी कई बार दवाइयों के प्रयोग से ठीक हो जाती है। अन्यथा IUI या ICSI के विकल्प भी उपलब्ध हैं।